दशकों तक देश में सरकार चलाने वालों ने जनजातीय समाज को नजरअंदाज किया : नरेंद्र मोदी

भोपाल। आजादी के बाद देश में दशकों तक जिन्होंने सरकार चलाई, उन्होंने अपनी स्वार्थ की राजनीति को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने जनजातीय समाज की संस्कृति और उसके सामर्थ्य को नजरअंदाज किया। उनके लिए जनजातीय भाई-बहनों के दुख, तकलीफ, परेशानियां और स्वास्थ्य कोई मायने नहीं रखते। इन राजनीतिक दलों ने जनजातीय समाज को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा और बाद में चुनाव के समय उन्हीं सुविधाओं के नाम पर वोट मांगते रहे। इन्होंने आदिवासी समाज को अपने भाग्य पर असहाय छोड़ दिया। लेकिन हमारी सरकार ने जनजातीय समाज और उसके विकास को अपनी पहली प्राथमिकता में रखा है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस समारोह का शुभारंभ करते हुए कही। समारोह में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी संबोधित किया।


प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को जनजातीय गौरव दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि आज का दिन जनजातीय समाज के लिए, पूरे देश के लिए बहुत महत्व का दिन है। आज भारत में पहली बार जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा है और पहली बार इतने बड़े पैमाने पर देश की कला संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रनिर्माण में जनजातीय समाज के योगदान की चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लेकिन जब हम जनजातीय समाज के योगदान की बात करते हैं, तो कुछ लोगों को तकलीफ होती है। इन्होंने जानबूझकर इस बारे में जानकारी नहीं दी और देश को अंधेरे में रखा। जानकारी दी भी, तो बहुत सीमित दी। प्रधानमंत्री ने निरंतर स्नेह और विश्वास के लिए प्रदेश के जनजातीय समाज का आभार जताते हुए कहा कि आपका यही स्नेह सेवा के लिए प्रेरणा और ऊर्जा देता है और इसी ऊर्जा से शिवराज सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जो जनजातीय क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के आत्मसम्मान और उनके अधिकारों के लिए हम दिन रात काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हम जैसे महात्मा गांधी, सरदार पटेल की जयंती मनाते हैं, वैसे ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाएगी।
राष्ट्रनिर्माण में जनजातीय समाज के योगदान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ जनजातीय समाज ने आंदोलन किया और योद्धाओं ने संघर्ष किया। रानी दुर्गावती और रानी कमलापति के संघर्ष और बलिदान को देश भूल नहीं सकता। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने वर्षों तक जो संघर्ष किया, उसमें भील समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रभु राम के जीवन की सफलता में भी जनजातीय समाज का अहम योगदान रहा है। इन्हीं लोगों ने जंगल में पहुंचे एक राजकुमार को उसके लक्ष्य तक पहुंचाने में सहायता की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश जनजातीय समाज का ऋणी है। हम इस कर्ज को चुका तो नहीं सकते, लेकिन इनकी विरासत को उचित स्थान देकर अपना दायित्व अवश्य निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय क्षेत्रों को विकास में उनकी उचित हिस्सेदारी दे रही है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी जिन योजनाओं का लाभ अन्य लोगों को मिल रहा है, उनका लाभ जनजातीय भाइयों को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि जनजातीय क्षेत्रों पहुंचना कठिन है, लेकिन ये सिर्फ बहाने थे और इन्हीं बहानों की आड़ लेकर जनजातीय समाज को सुविधाओं से वंचित रखा। पहले बहन-बेटियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता था, अब प्रदेश में जलजीवन मिशन के अंतर्गत 30 लाख परिवारों को घर पर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र अत्यंत समृद्ध रहे हैं, लेकिन पहले की सरकारों ने उनका सिर्फ दोहन किया। हमारी सरकारों ने इन क्षेत्रों में मिलने वाले खनिज राजस्व का एक प्रतिशत हिस्सा इन क्षेत्रों के लिए ही रखा है। हमने योजनाओं और नीतियों में जो बदलाव किए हैं, उनसे जनजातीय क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति की, हर समाज की अपनी आकांक्षाएं होती हैं, सपने होते हैं। इन्हें उड़ान देना हमारी प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनजातीय समाज में प्रतिभाओं की कमी नहीं रही, लेकिन सरकारों ने अवसर देने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। सृजन आदिवासी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इन सरकारों ने उसे बाजार से नहीं जोड़ा। इन्होंने बांस की खेती तक को कानूनी मकड़जाल में उलझाकर रखा और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आदिवासी भाइयों को लंबा इंतजार कराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी वनधन और वनोपज पर एमएसपी जैसी योजनाएं जनजातीय क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें सिर्फ 8-9 वनोपज पर एमएसपी देती थीं, हमारी सरकार ने 90 वनोपजों को इसमें शामिल किया है। वन क्षेत्रों में जमीन के 20 लाख पट्टे दिए हैं। हमारा जोर युवाओं की शिक्षा और कौशल विकास पर है। हमारा लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों में 750 एकलव्य मॉडल स्कूल खोलने का है। हमारी सरकार 30 लाख आदिवासी छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप दे रही है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा में पढ़ाई का प्रावधान है, ताकि आदिवासी युवा बिना परेशानी के पढ़ाई कर सकें।
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कार्यक्रम में बिरसा मुण्डा को प्रणाम करते हुए कहा कि जनजातीय गौरव दिवस बिरसा मुण्डा का ही नहीं संपूर्ण जनजातीय समाज का सम्मान है। भारत सरकार ने बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, इसके लिए हम प्रधामनंत्री के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के रूप में जनजातीय समाज को अपने गौरवमयी और संघर्षमयी इतिहास के लिए सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किये जा रहे जनजातीय समाज के विकास के लिए किए जा रहे चहुंमुखी प्रयास उनके अमर बलिदानों को राष्ट्र की सच्ची श्रद्धांजलि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल सम्मेलन नहीं बल्कि गरीब और जनजातीय समाज की जिंदगी बदलने का अभियान है, जो प्रधानमंत्री  के नेतृत्व में शुरू हुआ है।
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस आरोप लगाती है कि भाजपा सरकार जनजातीय गौरव दिवस के नाम पर पैसे की बर्बादी कर रही है। कांग्रेस ने कभी जनजातीय भाई बहनों के लिए कुछ नहीं किया। इन्होंने रानी कमलापति को भुला दिया। न तो अंग्रेजों ने और न ही कांग्रेस ने उन्हें इतिहास में उचित स्थान दिया, लेकिन प्रधानमंत्री ने हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम रखकर जनजातीय समाज, भोपाल और मध्यप्रदेश का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनजातीय भाई बहनों के कल्याण और उत्थान के लिए कई योजनाएं बनायी हैं, जिनका मध्यप्रदेश में पालन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। हम जनजातीय बंधुओं के जीवन में बदलाव लायेंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र और प्रदेश की योजनाओं का लाभ जनजातीय वर्ग तक पहुंचाने में मध्यप्रदेश में पीछे नहीं रहेगा।
चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोरोनाकाल की दोनों लहरों के दौरान मध्यप्रदेश को 9857 करोड़ रूपए का मुफ्त राशन दिया। जनजातीय भाई बहनों को उनके गांव में ही राशन मिले, इसके लिए प्रधानमंत्री ने राशन आपके ग्राम योजना शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत राशन गांवों तक पहुंचेगा और इसके पहुंचाने का काम जनजातीय युवा ही करेंगे। जिससे उन्हें रोजगार भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता को कायम करते हुए मध्यप्रदेश में पेसा कानून लागू किया जायेगा, जिससे जनजातीय भाई बहनों के अधिकारों की रक्षा हो सके।